सही समय सकल निपटान (आरटीजीएस) के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न १. आरटीजीएस प्रणाली क्या है ?
उत्तर : ''आरटीजीएस'' का प्रथमाक्षर सही समय सकल नपटान के लिए प्रयुक्त किया गया है. आरटीजीएस प्रणाली एक निधि अंतरण तकनीक है जिसमें एक बैंक से दूसरे बैंक में निधि का अंतरण ''सही समय'' और ''सकल निपटान'' के आधार पर होता है. बैंकिंग चैनल के माध्यम से यह संभवत: सबसे तेज़ रुपया अंतरण प्रणाली है. ''सही समय'' में निपटान का अर्थ बिना किसी प्रतीक्षा अवधि के भुगतान के लेन-देन से है. जैसे ही प्रक्रिया संपन्न होती है वैसे ही लेन-देन का निपटान हो जाता है. ''सकल निपटान'' का अर्थ बिना किसी अन्य लेन-देन के साथ एकत्र किए एक पर एक आधार पर लेन-देन का निपटान करना होता है. यह मानते हुए कि रुपया का अंतरण भारतीय रिजर्व बैंक के खाताबही में होता है, भुगतान को हिसाब में अंतिम रूप से एवं वापस न करने योग्य मान लिया जाता है.

प्रश्न २. इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण प्रणाली (ईएफटी) अथवा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली (एनईएफटी) से सही समय सकल निपटान (आरटीजीएस) प्रणाली किस तरह भिन्न है ?
उत्तर : ईएफटी और एनईएफटी इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण माध्यम हैं जो एक भिन्न नेट निपटान (डीएनएस) आधार पर परिचालन करते हैं और जो कि लेन-देनों का निपटारा समूहों में करते हैं. डीएनएस में, एक समय-विशेष पर निपटान संपन्न होता है. तब तक सारे लेन-देन रुके रहते हैं. उदाहरणार्थ, एनईएफटी निपटान सप्ताह के दिनों के दौरान छ: बार (प्रात: ९.३० बजे, १०.३० बजे, दोपहर १२.०० बजे, १.०० बजे, ३.०० बजे और ४.०० बजे) और शनिवार को तीन बार (९.३० बजे, १०.३० बजे और दोपहर १२.०० बजे) होते हैं. निर्धारित निपटान समय के बाद प्रारंभ किए गए लेन-देन को अगले निर्धारित निपटान समय तक प्रतीक्षा करनी होती है. इसके विपरीत, आरटीजीएस में, लेन-देन की प्रक्रिया आरटीजीएस कारोबार काल के दौरान लगातार चलती रहती है.

प्रश्न ३. क्या आरटीजीएस लेन-देन के लिए कोई न्यूनतम / अधिकतम राशि की शर्त है ?
उत्तर : आरटीजीएस प्रणाली प्राथमिक रूप से ऊँचे मूल्यों वाले लेन-देनों के लिए होती हैं. आरटीजीएस के द्वारा प्रेषित होने की न्यूनतम राशि रु.१ लाख होती है. आरटीजीएस लेन-देन के लिए कोई उच्चतम सीमा नहीं है. ईएफटी और एनईएफटी लेन-देनों के लिए किसी न्यूनतम अथवा अधिकतम राशि की शर्त निर्धारित नहीं की गई है.

प्रश्न ४. आरटीजीएस के अंतर्गत एक खाते से दूसरे खाते में निधि के अंतरण में कितना समय लिया जाता है ?
उत्तर : सामान्य परिस्थितियों में हिताधिकारी शाखाओं से अपेक्षित है कि जैसे ही प्रेषण बैंक द्वारा निधियाँ अंतरित की जाती हैं, वे सही समय पर निधियाँ प्राप्त कर लें. हिताधिकारी बैंक को निधि अंतरण संदेश प्राप्त होने के दो घंटे के भीतर हिताधिकारी के खाते में जमा देनी पड़ती है.

प्रश्न ५. क्या भेजनेवाला ग्राहक हिताधिकारी के खाते में जमा हो चुके रुपयों के बारे में पावती प्राप्त करेगा ?
उत्तर : प्रेषक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से एक संदेश प्राप्त करेगा कि प्राप्तकर्ता बैंक को रुपए प्राप्त हो गए हैं. इसी के आधार पर प्रेषक बैंक प्रेषणकर्ता ग्राहक को सूचना दे सकता है कि प्राप्तकर्ता बैंक को रुपए दे दिए गए हैं.

प्रश्न ६. क्या भेजनेवाला ग्राहक रुपए वापस प्राप्त कर सकेगा यदि वह हिताधिकारी के खाते में जमा नहीं किए गए हों ? यदि हाँ तो कब ?
उत्तर : हां. यह अपेक्षा की जाती है कि प्राप्तकर्ता बैंक हिताधिकारी के खाते में तुरंत ही जमा दे देंगे. यदि किसी कारणवश रुपए जमा नहीं होते है तो प्राप्तकर्ता बैंक को दो घंटे के भीतर रुपए प्रेषक बैंक को वापस लौटाना पड़ेगा. एक बार जब रुपए प्रेषक बैंक द्वारा वापस प्राप्त कर लिए जाते हैं तो ग्राहक के खाते में मूल नामे प्रविष्टि मिटा दी जाती है.

प्रश्न ७. कितने समय तक आरटीजीएस सेवा खिड़की खुली रहती है ?
उत्तर : ग्राहकों के लेन-देन के लिए आरटीजीएस सेवा खिड़की सप्ताह के दिनों में प्रात: ९.०० बजे से लेकर अपरान्ह १५.०० बजे तक एवं शनिवार को प्रात: ९.०० बजे से दोपहर १२.०० बजे तक अर्थात् भारतीय रिजर्व बैंक में निपटान करने हेतु ग्राहक के लेन-देन को स्वीकार करने के लिए सप्ताह के दिनों में प्रात: ९.०० बजे से लेकर अपरान्ह १५.०० बजे तक एवं शनिवार को प्रात: ९.०० बजे लेकर दोपहर १२.०० बजे तक खुली रहती है. तथापि, इन घंटों के बीच का समय शाखाओं में ग्राहकों के लिए निर्धारित अलग-अलग समय के कारण भिन्न-भिन्न हो सकता है. अंतरबैंक लेन-देनों के लिए सेवा खिड़की सप्ताह के दिनों के दौरान प्रात: ९.०० बजे से लेकर शाम १७.०० बजे तक एवं शनिवार को प्रात: ९.०० बजे से लेकर दोपहर २.०० बजे तक खुली रहती है.

प्रश्न ८. आरटीजीएस लेन-देनों के लिए प्रक्रिया शुल्क / सेवा शुल्क क्या है ?
उत्तर : जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने ३१ मार्च, २००८ तक सभी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान उत्पादों के लिए अपना प्रक्रिया शुल्क हटा लिया है, बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले उगाही शुल्क का निर्णय संबंधित बैंकों के विवेक पर छोड़ दिया है. बैंकवार उगाही शुल्क का विवरण भारतीय रिजर्व बैंक के वेबसाइट
www.rbi.org.in पर उपलब्ध है.

प्रश्न ९. वह क्या अनिवार्य जानकारी है जिसे प्रेषित करने वाले ग्राहक को अपने प्रेषण को संपन्न करने हेतु बैंक में प्रस्तुत करना होता है ?

उत्तर : आरटीजीएस प्रेषण को संपन्न करने हेतु प्रेषणकर्ता ग्राहक को निम्नलिखित जानकारी बैंक को प्रस्तुत करना होता है :-


१. प्रेषित की जाने वाली राशि
२. नामे किया जाने वाला उनका खाता संख्या
३. हिताधिकारी बैंक का नाम
४. हिताधिकारी ग्राहक का नाम
५. हिताधिकारी ग्राहक का खाता संख्या
६. सूचनाएँ यदि कोई हो, प्राप्त करने के लिए प्रेषक
७. प्राप्तकर्ता शाखा का आईएफएससी कोड

प्रश्न १०. कोई व्यक्ति प्राप्तकर्ता शाखा का आईएफएससी कोड कैसे जानेगा ?
उत्तर : हिताधिकारी ग्राहक अपनी शाखा से आईएफएससी कोड प्राप्त कर सकता है. आईएफएससी कोड चेक के पन्ने पर भी उपलब्ध रहता है. यह कोड संख्या और शाखा का विवरण हिताधिकारी द्वारा भेजने वाले ग्राहक को बताया जा सकता है.

प्रश्न ११. क्या भारत में सभी बैंक शाखाएँ आरटीजीएस सेवा उपलब्ध कराती हैं ?
उत्तर : नहीं. भारत में सभी बैंक शाखाएँ आरटीजीएस में सक्षम नहीं हैं. ३१ जनवरी, २००७ को २६,००० से अधिक बैंक शाखाएँ आरटीजीएस में सक्षम थीं. इन शाखाओं की सूची भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट
www.rbi.org.in/Scripts/Bs_viewRTGS.aspx पर उपलब्ध है.

प्रश्न १२. क्या कोई तरीका है कि कोई प्रेषक-ग्राहक प्रेषण लेन-देन का पता लगा सके ?
उत्तर : यह प्रेषक-ग्राहक और प्रेषणकर्ता बैंक के बीच की गई व्यवस्था पर निर्भर करेगा. इंटरनेट बैंकिंग सुविधा वाले कुछ बैंक यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं. एक बार जब हिताधिकारी बैंक के खाते में निधियाँ जमा हो जाती हैं तो प्रेषक-ग्राहक अपने बैंक से ई-मेल अथवा मोबाइल के एसएमएस के माध्यम से इस बात की पुष्टि ले सकता है.

प्रश्न १३. हिताधिकारी के खाते में जमा नहीं मिलने अथवा जमा में देरी होने के मामले में मैं किससे संपर्क कर सकता हूँ ?
उत्तर : आप अपने बैंक / शाखा से संपर्क करें. यदि आपकी समस्या संतोषजनक रूप से हल नहीं होती है तो भारतीय रिजर्व बैंक के ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क किया जा सकता है :-

मुख्य महा प्रबंधक
भारतीय रिजर्व बैंक
ग्राहक सेवा विभाग
प्रथम तल, अमर बिल्डिंग,
फोर्ट,
मुंबई - ४०० ००१

या फिर ई-मेल भेजें.

प्रश्न १४. किसी विशिष्ट दिवस में कितनी मात्रा में और कितने मूल्य का लेन-देन आरटीजीएस के माध्यम से किया जाता है ?
उत्तर : किसी विशिष्ट दिन में आरटीजीएस के द्वारा एक दिन में रु.१,५०,००० करोड़ के मूल्य का लगभग १४००० लेन-देन किया जाता है.

प्रश्न १५. प्रेषक-ग्राहक यह कैसे जान सकता है कि हिताधिकारी की बैंक शाखा आरटीजीएस के माध्यम से प्रेषण को स्वीकार करती है या नहीं ?
उत्तर : आरटीजीएस के माध्यम से निधि अंतरण के लिए, भेजने वाली बैंक शाखा एवं प्राप्त करने वाली बैंक शाखा, दोनों को आरटीजीएस सक्षम होना पड़ेगा. ये सूचियाँ सभी आरटीजीएस सक्षम शाखाओं में तैयार रूप में उपलब्ध हैं. इसके अलावा, ये सूचियाँ भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट
www.rbi.org.in पर भी उपलब्ध हैं. यह देखते हुए कि ३००० से अधिक नगरों / शहरों और तालुकाओं में २६,००० से अधिक शाखाएँ आरटीजीएस प्रणाली के अंतर्गत हैं, यह सूचना प्राप्त करना कठिन नहीं होगा.