इतिहास


देना बैंक की स्थापना देवकरण नानजी के परिवार द्वारा २६ मई,१९३८ को देवकरण नानजी बैंकिंग कंपनी लिमिटेड के के नाम से की गई थी।

यह् १९३९ में सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित हुआ और कालांतर में इसका नाम बदल कर देना बैंक लिमिटेड हो गया।
 
 जुलाई,१९६९ में १३ अन्य बडे बैंकों के साथ देना बैंक राष्ट्रीयकृत हुआ तथा अब वह् बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रह्ण एवं ह्तांतरण) अधिनियम,१९७० के अधीन गठित एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है । बैंकिंग विनियमन अधिनियम,१९४९ के अंतर्गत बैंक बैंकिंग करोबार करने के अलावा बैंकिंग विनियमन अधिनियम,१९४९ की धारा ६ में यथावर्णित अन्य कारोबार भी कर सकता है।
 
 कीर्तिमान
 
 वर्ष १९९५ में वित्तीय क्षेत्र विकाापरक परियोजना के तह्त द्विस्तरीय पूंजी बढाने हेतु रु ७२.३ करोड़ का ऋण स्वीकृत करने हेतु विश्व बैंक द्वारा चुने गए छ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक।
 
 प्रौद्योगिकी उन्नयन एवं प्रशिक्षण के लिए विश्व बैंकों ऋण प्राप्त क रने वाले कुछेक बैंकों में से एक।
 
 नवंबर १९९६ में रु ९२.१३ करोड़ का बॅण्ड निर्गम जारी किया।
 
 नवंबर,१९९६ में रु १८० करोड़ का एकमात्र सार्वजनिक निर्गम।
 
 चुनिंदा मह्ानगरीय केन्द्रों में टेली बैंकिंग सुविधा की शुरुआत की।
 
 निम्नलिखित की शुरुआत करने में देना बैंक सर्वप्रथम रहा
 
 नाबालिग बचत योजना।
 
 ग्रामीण भारत में ''देना कृषि साख पत्र'' (डीकेएपी) के नाम के विख्यात क्रेडिट कार्ड।
 
 जुहू मुबंई में ड्राइव-इन-एटीएम काउण्टर।
 
 मुंबई की चुनिंदा शाखाओं में स्मार्ट कार्ड।
 
 बैंक सेवाओं की रेटिंग करने हेतु ग्राह्क रेटिंग प्रणाली।